हलकेच हातांनी घास भरव तू गे मजला माता पाषाणभेद in जे न देखे रवी... 7 Apr 2010 - 9:57 am 3 करुणकवितामुक्तक
आदाब अर्ज है !( २६-०७-११) हार जाने का हौसला है मुझे......... अश्फाक in जे न देखे रवी... 28 Mar 2010 - 11:47 am 3 करुणगझल