सरीवर सरी in जे न देखे रवी... 11 Mar 2021 - 12:37 pm मनातला ऐवज.. दिलाय उधार ठेव जपून... वाटलं तर परत कर.. कातर सांजवेळ डोळ्यातलं काजळ स्मिताच मोहळ .. अन् नाहीच जमलं तर उधळूही नको फक्त कुरवाळत राहा एक एक भाव जपत राहा.. मुक्त कविताकवितामुक्तक प्रतिक्रिया मस्त 13 Mar 2021 - 9:52 am | प्रचेतस मस्त धन्यवाद! 25 Mar 2021 - 3:59 pm | सरीवर सरी धन्यवाद! वाटलं तर 25 Mar 2021 - 4:53 pm | गणेशा वाटलं तर परत कर.. कातर सांजवेळ डोळ्यातलं काजळ स्मिताच मोहळ वा... मस्त 25 Mar 2021 - 6:13 pm | सरिता बांदेकर मस्त!! खरंच एक एक भाव जपत रहा.... धन्यवाद! 30 Mar 2021 - 2:04 pm | सरीवर सरी धन्यवाद!
प्रतिक्रिया
13 Mar 2021 - 9:52 am | प्रचेतस
मस्त
25 Mar 2021 - 3:59 pm | सरीवर सरी
धन्यवाद!
25 Mar 2021 - 4:53 pm | गणेशा
वाटलं तर
परत कर..
कातर सांजवेळ
डोळ्यातलं काजळ
स्मिताच मोहळ
वा...
25 Mar 2021 - 6:13 pm | सरिता बांदेकर
मस्त!!
खरंच एक एक भाव जपत रहा....
30 Mar 2021 - 2:04 pm | सरीवर सरी
धन्यवाद!