दु:खाचे निखारे

गणेशा's picture
गणेशा in जे न देखे रवी...
23 Aug 2012 - 9:52 pm

भिजल्या डोळ्यासही ना काही वाटले
गालावर अमुर्त दु:ख ओघळले कोवळे
ना दिशा, ना आकार ना झंकार माहित
ओठांत अव्यक्त शब्द अडकले सगळे

सोनेरी दर्प घेवून अवतरली किरणे
मायेचा अर्क दवबिदुंत पाझरे
आसवांच्या मोत्यांची मजजवळ तोरणे
हलकाच स्पर्श ओलसर, दु:खाचे निखारे

कोमेजलेला गंध, झिजलेला वृ़क्ष
ओघळणारे मेघतांडव नेत्रात लुप्त
ना दिशा, ना आकार ना झंकार माहित
भिजल्या डोळ्यासही ना काही वाटले

------ शब्दमेघ

कविता

प्रतिक्रिया

प्रचेतस's picture

23 Aug 2012 - 10:03 pm | प्रचेतस

बर्‍याच दिवसांनी लिहिलंस, छान लिहिलंस.
विषण्ण करणारं लिहिलंस.

अत्रुप्त आत्मा's picture

23 Aug 2012 - 10:31 pm | अत्रुप्त आत्मा

+१

जाई.'s picture

23 Aug 2012 - 11:06 pm | जाई.

+२
असेच म्हणते

मदनबाण's picture

23 Aug 2012 - 10:04 pm | मदनबाण

छान...

पैसा's picture

23 Aug 2012 - 10:28 pm | पैसा

छान लिहिलंस!

रेवती's picture

24 Aug 2012 - 3:07 am | रेवती

कविता आवडली.

किसन शिंदे's picture

24 Aug 2012 - 7:28 am | किसन शिंदे

कविता आवडली.

पक पक पक's picture

24 Aug 2012 - 9:15 pm | पक पक पक

लय भारी रे...

शैलेन्द्र's picture

24 Aug 2012 - 9:22 pm | शैलेन्द्र

आवडलं..

"ना दिशा, ना आकार ना झंकार माहित
ओठांत अव्यक्त शब्द अडकले सगळे"

सुंदर..

सूड's picture

24 Aug 2012 - 9:26 pm | सूड

छान लिहीलंय.