किती छानशी झुळूक हळूच लहरत गेली...

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विजयकुमार देशपांडे in दिवाळी अंक
14 Nov 2020 - 10:00 am



किती छानशी झुळूक हळूच लहरत गेली..

किती छानशी झुळूक हळूच लहरत गेली

भेट आपली पहिली तेव्हा स्पर्शत गेली..

सुंदर होती पाहत मागे गेली कोठे

हृदयावर ती घावच माझ्या घालत गेली..

तीच नेमकी पावसात पण आठवली का

डोक्यावरुनी एक सर मला रडवत गेली..

खास खुणेचा तिने फेकला होता गजरा

कंटाळत ती वाट पाहिली कळवत गेली..

स्वप्नामध्ये वरुन आली एक अप्सरा

चांदण्यात मज सोबत घेता विहरत गेली..

..... विदेश


प्रतिक्रिया

गणेशा's picture

15 Nov 2020 - 1:59 pm | गणेशा

छान

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27 Nov 2020 - 6:15 am | विदेश

धन्यवाद

Bhakti's picture

15 Nov 2020 - 2:30 pm | Bhakti

मस्तच

विदेश's picture

27 Nov 2020 - 6:15 am | विदेश

धन्यवाद

टर्मीनेटर's picture

15 Nov 2020 - 10:53 pm | टर्मीनेटर

@विजयकुमार देशपांडे

'किती छानशी झुळूक हळूच लहरत गेली..'

ही कविता आवडली  👍

पुढील लेखनासाठी शुभेच्छा!

✨ शुभ दीपावली ✨

टर्मीनेटर

विदेश's picture

27 Nov 2020 - 6:16 am | विदेश

धन्यवाद

प्राची अश्विनी's picture

23 Nov 2020 - 5:23 pm | प्राची अश्विनी

झुळूक सुंदरच आहे.

विदेश's picture

27 Nov 2020 - 6:17 am | विदेश

धन्यवाद

ज्ञानोबाचे पैजार's picture

27 Nov 2020 - 9:20 am | ज्ञानोबाचे पैजार

झुळूक सुखावून गेली

पैजारबुवा,

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1 Dec 2020 - 6:41 pm | विदेश

धन्यवाद

बबन ताम्बे's picture

27 Nov 2020 - 5:38 pm | बबन ताम्बे

झुळूक हळुवार स्पर्श करून गेली.

विदेश's picture

1 Dec 2020 - 6:38 pm | विदेश

धन्यवाद