पडघम २०१४- भाग ३: बॅटलग्राऊंड स्टेट- मध्य प्रदेश
यापूर्वीचे लेखन
भाग १: राज्य विधानसभा आणि लोकसभा निवडणुकांमधील मतदानामधील फरक
भाग २: क्रिटिकल मास
या भागापासून मी विविध राज्यांमधील माझे अंदाज प्रसिध्द करत आहे. सुरवात मध्य प्रदेशपासून करत आहे.
सुरवातीला मध्य प्रदेशात २००८ च्या विधानसभा आणि २००९ च्या लोकसभा निवडणुकांमध्ये काय झाले हे बघू.
तक्ता क्रमांक १
तक्ता क्रमांक १ वरून खालील गोष्टी कळतात
१. २००८ च्या विधानसभा निवडणुकांपेक्षा २००९ च्या लोकसभा निवडणुकांमध्ये कॉंग्रेसची कामगिरी जास्त चांगली होती.
२. पहिल्या लेखात म्हटल्याप्रमाणे राष्ट्रीय पक्षांना लोकसभा निवडणुकांमध्ये विधानसभा निवडणुकांपेक्षा जास्त मते मिळतात आणि प्रादेशिक/लहान पक्ष/अपक्ष/इतरांना लोकसभा निवडणुकांमध्ये विधानसभा निवडणुकांपेक्षा कमी मते मिळतात. हा फरक आपल्याला नक्कीच बघायला मिळत आहे.
३. डिसेंबर २००८ च्या विधानसभा निवडणुकांपासून मे २००९ च्या लोकसभा निवडणुकांपर्यंत भाजप आणि कॉंग्रेस यांची एकूण १३.५% मते वाढली तर इतर पक्षांची १३.५% मते कमी झाली. वरकरणी असे वाटेल की कॉंग्रेसने यापैकी ७.७% मते आपल्याकडे खेचली तर भाजपने ५.८% मते आपल्याकडे खेचली.पण लोकसभा निवडणुकांमध्ये उमा भारतींचा भारतीय जनशक्ती पक्ष नव्हता.त्यामुळे त्या पक्षाला विधानसभेत मिळालेली ४.७% मतांपैकी बरीचसी मते भाजपला मिळाली असणार असे म्हणायला हरकत नसावी. तेव्हा लहान पक्ष आणि इतर यांच्याकडून कॉंग्रेसने आपल्याकडे मोठ्या प्रमाणावर मते खेचून आणली तर भाजपला तितक्या प्रमाणावर ही मते खेचून आणण्यात यश मिळाले नाही.
४. २००९ च्या निवडणुकांच्या वेळी देशात कॉंग्रेसविरोधी वातावरण नव्हते.किंबहुना २००९ मध्ये बऱ्याच अंशी कॉंग्रेसला अनुकूल वातावरण होते. त्यामुळे कॉंग्रेसला ही मते भाजपपेक्षा जास्त प्रमाणात आपल्याकडे खेचून घेता आली.
या पार्श्वभूमीवर २०१३ च्या विधानसभा निवडणुकांमध्ये काय झाले ते बघू.
तक्ता क्रमांक २
२०१३ च्या विधानसभा निवडणुकांमध्ये आपल्याला पुढील गोष्टी बघायला मिळाल्या:
१. २००८ च्या विधानसभा निवडणुकांच्या तुलनेत २०१३ मध्ये भाजप आणि कॉंग्रेस या दोन्ही पक्षांची मते वाढली.तर बसपा आणि इतर लहान पक्ष/अपक्ष यांची मते कमी झाले.नरेंद्र मोदींना पंतप्रधानपदाचे उमेदवार म्हणून जाहिर केल्यानंतर अशाप्रकारे धृवीकरण होणे अपेक्षित होते आणि तसे ते झाले असे चित्र दिसते.
२. विधानसभा मतदारसंघांमधील मते लोकसभा मतदारसंघनिहाय एकत्र केल्यास भाजपला २६ तर कॉंग्रेसला ३ लोकसभा मतदारसंघांमध्ये आघाडी मिळाली होती. डिसेंबर २०१३ मधील विधानसभा मतदारसंघांमधील मते लोकसभा मतदारसंघनिहाय एकत्र केल्यास पुढील चित्र दिसते
तक्ता क्रमांक ३
माझे लोकसभा २०१४ साठीचे मध्य प्रदेशातील अंदाज
पहिल्यांदा एक गोष्ट स्पष्ट केली पाहिजे आणि ती म्हणजे इतर पक्षांची मते २००९ मध्ये कॉंग्रेसने आपल्याकडे अधिक प्रमाणात वळवली होती आणि याचे कारण (माझ्या मते) वर म्हटल्याप्रमाणे २००९ मध्ये देशातील वातावरण काही अंशी कॉंग्रेसला अनुकूल होते (निदान आताइतके प्रतिकूल नक्कीच नव्हते). २०१४ मध्ये तो फायदा भाजपला मिळेल. २०१३ मध्ये विधानसभेला बसपा आणि इतरांना १६.८% मते मिळाली होती.त्यापैकी किमान ८% मते कमी व्हावीत आणि त्यापैकी सुमारे ६% भाजपकडे वळतील आणि २% कॉंग्रेसकडे वळतील असे गृहित धरतो.
दुसरे म्हणजे आताच्या निवडणुका लोकसभा निवडणुका आहेत आणि केंद्रात १० वर्षे जुने युपीए सरकार आहे तेव्हा प्रस्थापितविरोधी मते कॉंग्रेसविरूध्द जाणार आहेत. तर नुकत्याच झालेल्या विधानसभा निवडणुकांमध्ये भाजपचा जोर होता.तसेच इतर पक्षांपैकी काही प्रमाणात बसपाने राज्यात पाय रोवले आहेत.पण ते लोकसभेची जागा जिंकायला तितक्या प्रमाणावर पुरेसे आहेत असे नाही. तेव्हा प्रस्थापितविरोधी मते एकतर भाजपला जातील नाहीतर नोटा/आआपला जातील.
या पार्श्वभूमीवर विधानसभा निवडणुकांमध्ये काही लोकसभा मतदारसंघात भाजपला ५% पेक्षा कमी आघाडी असली (बालाघाट,दमोह,खारगोन, मंडला आणि सिधी) तरी या जागा जिंकायला भाजपला त्रास होऊ नये.
पुढील मतदारसंघांमध्ये विधानसभेपेक्षा वेगळा कौल बघायला मिळेल असे मला वाटते:
१. छिंदवाडा: विधानसभा निवडणुकांमध्ये छिंदवाडामधून भाजपला आघाडी होती.पण लोकसभेसाठी कमलनाथ हा तगडा उमेदवार कॉंग्रेसकडून आहे.तेव्हा ही जागा कॉंग्रेस जिंकेल असे मला वाटते.
२. रतलाम: विधानसभा निवडणुकांमध्ये रतलाममधून भाजपला आघाडी होती.पूर्वी हा मतदारसंघ झाबुआ नावाने ओळखला जाई. हा मतदारसंघ कॉंग्रेसचा बालेकिल्ला आहे. या मतदारसंघातून १९८० ते १९९६ या निवडणुकांमध्ये कॉंग्रेसचे दिलीपसिंग भुरिया निवडून येत.त्यांनी १९९८ मध्ये पक्षांतर करून भाजपत प्रवेश केला.त्यानंतरच्या प्रत्येक निवडणुकीत त्यांचा त्यांचे बंधू कांतीलाल भुरिया यांनी पराभव केला आहे. यावेळीही निकाल वेगळा लागेल असे मला तरी वाटत नाही.
३.ग्वाल्हेर: विधानसभा निवडणुकांमध्ये ग्वाल्हेरमधून कॉंग्रेसला अगदी निसटती आघाडी होती.ग्वाल्हेरमधून शिंदे घराण्यापैकी कोणी निवडणुक लढवत असेल तर त्या उमेदवाराला हरविणे केवळ दुरापास्त.पण शिंदे घराण्यापैकी कोणी उमेदवार नसेल तर मात्र इतरांना संधी मिळते.यावेळी भाजपने बजरंग दलाचे माजी प्रमुख जयभानसिंग पवय्या (१९९९ मधील विजेते) आणि कॉंग्रेसने अशोक सिंग या फार परिचित नसलेल्या उमेदवाराला उभे केले आहे.मला वाटते यात भाजप बाजी मारेल.
तेव्हा मध्य प्रदेशातून पुढील प्रमाणे निकाल लागतील असे मला वाटते.
तक्ता क्रमांक ४
कॉंग्रेस गुना (ज्योतिरादित्य शिंदे), रतलाम (कांतीलाल भुरिया) आणि छिंदवाडा (कमलनाथ) या जागा जिंकेल असा माझा अंदाज आहे.तर उरलेल्या सगळ्या जागांवर भाजपचा विजय होईल.
शक्य झाल्यास १६ मे रोजी मतमोजणीचे कल हाती येतील त्याप्रमाणे याच धाग्यावर त्यावर भाष्य करेन.
| मध्य प्रदेश | २००८ | २००९ | २००८ | २००९ | २००८ | २००९ | |
| मते % | मते % | मतांमधील फरक | विधानसभा जागा | विधानसभा जागा आघाडी | लोकसभा जागा आघाडी | लोकसभा जागा | |
| भाजप | ३७.६% | ४३.४% | ५.८% | १४३ | १२२ | २२ | १६ |
| कॉंग्रेस | ३२.४% | ४०.१% | ७.७% | ७१ | १०० | ७ | १२ |
| भारतीय जनशक्ती | ४.७% | ०.०% | -४.७% | ५ | ० | ० | ० |
| बसपा | ९.०% | ५.९% | -३.१% | ७ | ७ | ० | १ |
| सपा | २.०% | २.८% | ०.८% | १ | १ | ० | ० |
| इतर | १४.३% | ७.८% | -६.५% | ३ | ० | ० | ० |
| मध्य प्रदेश | २०१३ | ||
| मते % | विधानसभा जागा | लोकसभा जागा आघाडी | |
| भाजप | ४४.९% | १६५ | २६ |
| कॉंग्रेस | ३६.४% | ५८ | ३ |
| बसपा | ६.३% | ४ | ० |
| नोटा | १.९% | ० | ० |
| इतर | १०.५% | ३ | ० |
| लोकसभा मतदारसंघ | भाजप | कॉंग्रेस | बसपा | इतर | आघाडी पक्ष | आघाडी % |
| बालाघाट | ३६.५% | ३३.१% | ६.६% | २३.८% | भाजप | ३.५% |
| बेतुल | ५१.४% | ३६.८% | १.८% | १०.०% | भाजप | १४.६% |
| भिंड | ३४.५% | २८.३% | १७.३% | १९.९% | भाजप | ६.३% |
| भोपाळ | ५४.९% | ३३.८% | २.०% | ९.३% | भाजप | २१.१% |
| छिंदवाडा | ४३.८% | ३८.९% | १.८% | १५.५% | भाजप | ४.९% |
| दमोह | ४४.०% | ३९.४% | ५.६% | १०.९% | भाजप | ४.५% |
| देवास | ४९.४% | ४०.४% | १.४% | ८.७% | भाजप | ९.०% |
| धार | ४४.८% | ४५.८% | १.३% | ८.१% | कॉंग्रेस | १.०% |
| गुना | ४१.७% | ४५.३% | ६.५% | ६.५% | कॉंग्रेस | ३.६% |
| ग्वाल्हेर | ३६.९% | ३७.०% | १५.६% | १०.६% | कॉंग्रेस | ०.१% |
| होशंगाबाद | ५६.३% | ३०.३% | १.७% | ११.६% | भाजप | २५.९% |
| इंदोर | ५५.२% | ३७.३% | ०.८% | ६.७% | भाजप | १७.८% |
| जबलपूर | ५०.६% | ३९.६% | २.७% | ७.१% | भाजप | ११.०% |
| खजुराहो | ४१.६% | ३१.४% | १२.८% | १४.२% | भाजप | १०.२% |
| खंडवा | ५१.३% | ३७.६% | १.८% | ९.२% | भाजप | १३.७% |
| खारगोन | ४६.०% | ४५.३% | १.२% | ७.४% | भाजप | ०.७% |
| मंडला | ४०.९% | ३७.०% | १.७% | २०.५% | भाजप | ३.९% |
| मंदसौर | ४५.३% | ३५.३% | ३.४% | १६.०% | भाजप | ९.९% |
| मुरेना | ४१.०% | २८.३% | २४.१% | ६.६% | भाजप | १२.७% |
| राजगढ | ४८.८% | ४३.५% | १.९% | ५.८% | भाजप | ५.४% |
| रतलाम | ४२.५% | ३३.७% | २.३% | २१.५% | भाजप | ८.८% |
| रेवा | ३२.८% | २५.९% | २२.४% | १९.०% | भाजप | ६.९% |
| सागर | ४७.३% | ४२.१% | ४.१% | ६.५% | भाजप | ५.२% |
| सतना | ३३.१% | २७.७% | २५.६% | १३.६% | भाजप | ५.४% |
| शाहडोल | ४०.९% | ३५.१% | ४.८% | १९.२% | भाजप | ५.८% |
| सिधी | ३६.७% | ३५.२% | १०.४% | १७.७% | भाजप | १.५% |
| टिकमगड | ३९.८% | २९.०% | ९.६% | २१.६% | भाजप | १०.८% |
| उज्जैन | ५१.६% | ३६.२% | १.२% | ११.०% | भाजप | १५.४% |
| विदिशा | ५२.९% | ३९.४% | १.६% | ६.१% | भाजप | १३.६% |
| एकूण जागा | २९ |
| भाजप | २६ |
| कॉंग्रेस | ३ |
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आपल्या व्यासंगाला आणि
उत्तम लेख!
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सलाम
सहीच... तुझ्या मेहनतीला सलाम.
काँग्रेस - ३ व भाजप - २६ या
आपली हुशारी, निरीक्षणक्षमता व श्रमांना
बहुतेक एक्जीट पोल पण मध्यप्रदेश
_/\_
एकुणात आकड्याची सहमती