ये जेवण है, इस जेवण का
यही है, यही है, यही है रंगरूप
थोडी कम हैं, थोड़ी रोटीयाँ
यही है, यही है, यही है पाव सूप
ये ना कोसो, इसमें अपनी, मार है के पीट है
उसे दफना लो जो भी, जेवण की सीट है
ये स्वीट छोड़ो, यूं ना तोड़ो, हर फल इक अर्पण है
ये जेवण है, इस जेवण का...
धन से ना धनिया से, तूर ते ना गवार से
दासों को घोर बंदी है, भरते के प्यार से
बनिया लूटे, पर ना टूटे, ये कैसा लंघन है
ये जेवण है, इस जेवण का...
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मस्त
धन्यवाद माईसाहेब....हूकूम सरआखोंपर ...हे घ्या
In reply to मस्त by माईसाहेब कुरसूंदीकर
मस्त
मस्त जमलंय..
भारी ! :-)))
:):)
जबराव जबराव
धन्यवाद
कल्पना अवडली.
हाहाहा
राघव साहेब, तुमच्या साठी ओढून ताणून काहीतरी जुळवलय...
हाहाहा
In reply to राघव साहेब, तुमच्या साठी ओढून ताणून काहीतरी जुळवलय... by बाजीगर
खरपूस
एकदम कडक