पण त्यांना हवी तिच मते ते ठेवणार बाकीची उडवणार मग काय कराल?
राज ठाकरेने कौल घ्यावा आम्ही १००-१०० मते त्याच्या बाजूने टाकू.
'आज तक' अभीतक मुझे भरोसा नही हय|
जांभया टाळण्याचा जालीम उपाय.....झोपा
मी मत दिल्यानंतरची आजतकची 'दयनीय' परिस्थिती....
मी मत दिल्यानंतरची स्थिती....
क्या महाराष्ट्र सरकार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पर पाबंदी लगा देनी चाहिए?
हां 2467 20.8%
नहीं 9323 78.5%
पता नहीं 89 0.7%
कुल वोट : 11879
पहला वोट : मंगलवार, 21 अक्टूबर 2008 | 19:40 IST
अंतिम वोट : गुरूवार, 23 अक्टूबर 2008 | 16:30 IST
जांभया टाळण्याचा जालीम उपाय.....झोपा
आधीच कौला वर दगड घालून आलोये ..
काळजी नसावी...
७१% बंदी घालू नये ला मत आहेत..
बैलोबा चायनीजकर !!!
माणसात आणी गाढवात फरक काय ?
माणुस गाढव पणा करतो,गाढव कधीच माणुस पणा करत नाही..
जैनाचं कार्ट (verified= न पडताळणी केलेला)गुरुवार, 10/23/2008 - 16:43नवीन
हां 2464 20.8%
नहीं 9310 78.5%
पता नहीं 89 0.8%
कुल वोट : 11863
पहला वोट : मंगलवार, 21 अक्टूबर 2008 | 19:40 IST
अंतिम वोट : गुरूवार, 23 अक्टूबर 2008 | 16:26 IST
ह्याला म्हणत्यात आब्रु जाणं मत विचारणा-याची =))
जैनाचं कार्ट
शुभ कर्मन ते कबहूं न डरो....! आमचा ब्लॉग
मला योक मेल आला होता !!
मनसेचे समस अन मेलिंगचे कॅम्पेन लै भारी चालते.
परवा राजसाहेबांना अटक झाल्यावर राजसाहेबांच्या सौ. शर्मिला ठाकरेंनी पहिला समस पाठवुन असा कॅम्पेन सुरु केला असे काल झी २४ तास वर एकले !!
अरे हो मला पण काल एक भन्नाट एस्.एम.एस आलाय :-
ना शाप आहे, ना पाप आहे, महाराष्ट्राला यूपी-बिहारींचा ताप आहे. काळजी करू नको मराठी माणसा, राज ठाकरे त्यांचा बाप आहे.'
'आज तक' आणि तत्स्म त्याची भावंडे आमच्या खिजगीणतीतच नाही येत, पण अत्ताच बिपिनं सांगितल म्हणुन त्या साइट वर जाउन आलो.
कसली थोबाडात बसल्य सरखी अवस्था झाली आसेल त्या कौल करत्याची.
काल शरद पवारांनी निदर्शनास आणले आहे की, मनसे ही नोंदणीकृत पक्षसंघटना नसल्याने तिच्यावर बंदी घालता येत नाही.
घ्या, म्हणजे आधीच नाकाडावर आपटले ना!
असो:
मी मत दिल्यावरः
हां 2474 20.7%
नहीं 9368 78.5%
पता नहीं 89 0.7%
क्या महाराष्ट्र सरकार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पर पाबंदी लगा देनी चाहिए?
हां 2466 20.8%
नहीं 9311 78.5%
पता नहीं 89 0.8%
कुल वोट : 11866
पहला वोट : मंगलवार, 21 अक्टूबर 2008 | 19:40 IST
अंतिम वोट : गुरूवार, 23 अक्टूबर 2008 | 16:27 IST
बघा गंमत आहे, ते लोक मत वजा करत आहेत की काय? वर ९३५८ उल्लेख आहे मी मत दिले तर ९३११ कसे काय?
महाराष्ट्र सरकार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पर पाबंदी लगा देनी चाहिए?
हां 2466 20.8%
नहीं 9311 78.5%
पता नहीं 89 0.8%
कुल वोट : 11866
पहला वोट : मंगलवार, 21 अक्टूबर 2008 | 19:40 IST
अंतिम वोट : गुरूवार, 23 अक्टूबर 2008 | 16:27 IST
क्या महाराष्ट्र सरकार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पर पाबंदी लगा देनी चाहिए?
हां 2470 20.7%
नहीं 9352 78.5%
पता नहीं 89 0.7%
कुल वोट : 11911
पहला वोट : मंगलवार, 21 अक्टूबर 2008 | 19:40 IST
अंतिम वोट : गुरूवार, 23 अक्टूबर 2008 | 16:36 IST
क्या महाराष्ट्र सरकार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पर पाबंदी लगा देनी चाहिए?
हां 2566 20.2%
नहीं 10041 79.1%
पता नहीं 93 0.7%
कुल वोट : 12700
पहला वोट : मंगलवार, 21 अक्टूबर 2008 | 19:40 IST
अंतिम वोट : गुरूवार, 23 अक्टूबर 2008 | 17:26 IST
.................................................................................
आनंदयात्रीचे आभार! मी ही मत नोंदवले. आनंदयात्रीमुळे हा उद्योग समजला तरी, नपेक्षा त्या ठिकाणी आपण कशाला जातोय आणि कशाला समजताय की असा उपदव्याप सुरू केला आहे ते?
सध्या ७८.६% मतदान राजच्या बाजुने आहे!
क्या महाराष्ट्र सरकार को महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना पर पाबंदी लगा देनी चाहिए?
हां 2498 20.6%
नहीं 9526 78.6%
पता नहीं 91 0.8%
कुल वोट : 12115
पहला वोट : मंगलवार, 21 अक्टूबर 2008 | 19:40 IST
अंतिम वोट : गुरूवार, 23 अक्टूबर 2008 | 16:50 IST
अरेच्चा! मी ५.४० ला मत नोंदविले आणि हे म्हणतात अखेरचे मत ४.५० ला टाकले गेले?
त्यांचा सर्व्हर बीहारी आहे. कोणतीही गोष्ट लगेच डोक्यात शिरत नाही
झोंबणार्या थंडीने तुम्ही गारठले जात नाही याचे आश्चर्य बाळगु नका. अशा थंडीतही तुम्हा उब देणारी कोणतीतरी आठवण तुम्ही जवळ बाळगताय. त्या आठवणीला लाख सलाम
क्या बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी महाराष्ट्र जैसी हो गई है?
हा नवा कौल बघा आचरटांचाऽ.....
हो म्हणाल तर -- महाराष्ट्रात खराब आहेच असे
नाही म्हणाल तर-- बिहार चांगले
आनंद यात्री धन्यवाद
एरवी असल्या फालतू वाहिनीकडे ढुंकुन बघायचे देखिल मी कष्ट घेत नाहि कारण अमुल्य वेळेचा अपव्यय करण मनाला पटत नाहि पण आज मात्र आवर्जुन मत दिले .
आणि त्याच बरोबर चक्क हिंदी मधे प्रतिक्रिया देखिल .आयला ! शाळा सुटल्या पासुन हिंदीचा वापर फक्त बोलण्यापुरताच होता.लिहिताना अंमळ वेळच लागला
तर ते पत्र इथे टाकतेय .
राजने महाराष्ट्राबाहेर पडुन आपले राजकिय अस्तित्व पडताळुन बघावे अश्या आशयाच हा कौल होता.
जय महाराष्ट्र!
राज को अपनी हैसियत जानने के लिये महाराष्ट्र के बाहर जाने की कोई जरुरत नही है . उसका जन्म महाराष्ट्र और मराठीयों को उनका हक दिलाने के लिये हुवा है.
राज को चुनौती देने की औकात किसी की नही है.और आप जो राज ,मनसे ,शिवसेना तथा मराठीयों का नाम लेकर दुष्प्रचार कर रहे हो उसे तुरंत रोक दिजिए .
राजकी भुमिका या तो आप समझ नही रहे हो या फिर जानबुझकर अंजान बनने का नाटक कर रहे हो.
राज का बस यह केहना है की हर प्रदेश के नौजवानो को उसी प्रदेश मे नौकरी का प्रथम अवसर मिलना चाहीये.
जो जिस प्रदेश मे बस गया हो उसे उस प्रदेश कि संस्कृती का आदर करना चाहीए और वहां कि सभ्यता के अनुसार आचरण करा चाहीए और
यह नियम बाहर के प्रांतो मे बसनेवाले मराठी भाषिकों के लिए भी लागु होता है. आप तो बस अपना टिआरपी बढाने के लिये पुरे देश मे विद्वेष कि भावना बढाने मे लगे हुए है.
महाराष्ट्र के मराठी भाषिक और ना ही राज उत्तरभारतियों से नफरत करते है.हम जानते है की हम भारतिय है और सब एक है.
बस हम सब चाहते है कि हर प्रांत के भुमिपुत्र को प्रथम न्याय मिले ,हर एक प्रदेश मे बसनेवाले लोगोंका वहां के साधन संसाधनो पर प्रथम अधिकार होना चाहिए.
और यह अपेक्षा करना पुरी तरह जायज है.जिसका हक बहुभाषी़क हिंदुस्थान के संविधान ने भाषावार प्रांत रचना करते हुए हर एक प्रदेश को दिया है.और इस तथ्य को आप झुठला नही सकते.
अगर बिहार और उत्तरप्रदेश कि उन्नती और प्रगती हर एक क्षेत्र मे नहि हो रही है तो उस के लिये हम महाराष्ट्र के लोग जिम्मेदार नही है.जिस प्रदेश मै लालु मुलायम मायावती
जैसे राजनेता बसते हो उस प्रदेश कि उन्नती तो स्वयं भगवान भी नहि कर सकते.आंशिक रुप से उत्तरप्रदेश और बिहार कि जनता भी इसके लिये जिम्मेदार है .पिछले १५ सालों मे बिहार मे लालु यादव ही हुकुमत थी .और लालु एक ऐसे नेता है जिन्हे आम आदमि से और उसकी चिंताओ से कोई सरोकार नहि है. जो इन्सान भगवान के बनाये हुए जानवर का चार भी गटक लेता हो वो क्या प्रदेश की प्रगति करेगा.बिहार और उत्तरप्रदेश जो भारत के सबसे ज्यादा %खनिजसंपत्ती के मालिक है ऐसे संपन्न प्रदेश कि अगर प्रगती नहि हो रही है तो उस के लिये राज्य कि जनता और राज्यसरकार जिम्मेदार है.
और इस कारणों से महाराष्ट्र और अन्य प्रदेशों मे नौकरी और रोजगार की तलाश मे लोगो का आना लाजमी है .पर इस का मतलब ये तो नही की महाराष्ट्र के पढेलिखे नौजवान रोजगार से वंचित रह जाये और बाहर से आये हुए लोग उनकि छाती पर बैठ कर मुंग दले.
पवन नामक जिस परिक्षार्थि बच्चे की हत्या का दोष आप लोग राज और मनसे पर लगा रहे हो उस बच्चे कि मृत्यु रेलगाडि से गिरने की वजह से हुई है ना कि मनसे के कार्यकर्ताओ द्वारा मारपिट करने से.पर आप का तो सनसनी फैलाना यह धंदा बन चुका है.
आप सब हिंदि मिडिया वाले मिलकर राज को महाराष्ट्र को बदनाम करने की साजिश के तहत काम कर रहे हो.जिसका हम सब महाराष्ट्र के लोग निषेध करते है.पहेले आपलोग अपने गिरेबान मए झांक कर देखे और फिर किसी और पर उंगली उठाये.
अगर आपने वक्त रहते ये सब नही रोका तो फिर महाराष्ट्र के लोग ईंट का जवाब पत्थर से देना जानते है.क्यु की हम लोग छत्रपती शिवाजी के महाराष्ट्र मे बसने वाले लोग है जो अपने हक के लिये लडना जानते है ना तो हमे लालु जैसे किसी चालु आदमी की नसिहत की जरुरत है ना ही सहारे की.
जय हिंद!
जय महाराष्ट्र!
"अनामिका"
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च्यायला, मला वाईच उशीरा खबर मिळाली. वोट नाय फेकता आला.
पण ह्या वोटींग मुळे आजतक वाल्यांच्या **ला चांगलीच मिर्ची लागलीये भौ! आता आपली जात दाखवत त्यांनी हा असा कौल टाकलाय तिथे.:क्या बिहार में कानून-व्यवस्था की स्थिति भी महाराष्ट्र जैसी हो गई है?
काय बोलावे ह्यांच्या पार्शीलिटीला?
मराठ्यांनी चांगलाच हिसका दावला ह्या आजतकला!
(अत्यानंदीत) -इनोबा
कर्मण्ये वाधिकारस्ते | मां फलकेशू कदाचनं
: कार्यकर्त्यांनी कर्म करीत रहावे,आपल्या नावाचे फलक लागतील अशी अपेक्षा करु नये.
-इनोबा म्हणे-मराठमोळे वॉलपेपर
अजुन नवनविन कौल घेते सुटलेत लेकाचे.
एकाने अकलेचे तारे तोडलेत वाचा
{बिहार के लोगों के साथ हमेशा ही इस तरह के दुर्व्यवहार होते रहे हैं. मेरा मानना है कि महाराष्ट्र के लोग बिहार के लोगों की प्रतिभा से ईर्ष्या करते हैं. हम बुद्ध और महावीर की धरती के रहने वाले हैं. —
जितेंद्र गुप्ता }
हो रे बाबांनो सगळी अक्कल तुम्हा लोकांनाच म्हणुन तर तुमची अशी अवस्था .
आता हा नविन कौल.
महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना प्रमुख राज ठाकरे को अंग्रेजों की तरह "बांटो और राज करो" का खेल नहीं खेलना चाहिए. —सौरव, दिल्ली. »»» अन्य राय पढ़ें राय दें »»
"अनामिका"
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प्रतिक्रिया
नंदन
मराठी साहित्यविषयक अनुदिनी