सांगू काय, सांगू काय? — निमिष सोनार , Mon, 03/22/2010 - 14:24 प्रतिक्रिया द्या 💬 प्रतिसाद (1) आवडली ~~~~~~~~~~~~~ शुचि गुरुवार, 03/25/2010 - 06:45 नवीन आवडली ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ जितनी दिल की गहराई हो उतना गहरा है प्याला, जितनी मन की मादकता हो उतनी मादक है हाला, जितनी उर की भावुकता हो उतना सुन्दर साकी है,जितना ही जो रसिक, उसे है उतनी रसमय मधुशाला।।
आवडली ~~~~~~~~~~~~~ शुचि गुरुवार, 03/25/2010 - 06:45 नवीन आवडली ~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~ जितनी दिल की गहराई हो उतना गहरा है प्याला, जितनी मन की मादकता हो उतनी मादक है हाला, जितनी उर की भावुकता हो उतना सुन्दर साकी है,जितना ही जो रसिक, उसे है उतनी रसमय मधुशाला।।
आवडली ~~~~~~~~~~~~~