मराठी साहित्य, संस्कृती आणि लेखनाचे व्यासपीठ

गुरुवारचा शेर

विजुभाऊ · · काथ्याकूट
शाम है जाम है ; सुबह है जाम है दोपहर मे भी जाम है ; इधर भी जाम है ; उधर भी जाम है नजरीया ये आम है ; जहां देखू जाम है . . . . . . . ट्रॅफीक जो बढ गया है ;अब रस्ता ये आम है

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